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FX.co ★ GBP/USD विश्लेषण: 15 जुलाई — आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई से क्या उम्मीद की जा सकती है?

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विदेशी मुद्रा विश्लेषण:::2026-07-15T04:23:53

GBP/USD विश्लेषण: 15 जुलाई — आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई से क्या उम्मीद की जा सकती है?

GBP/USD विश्लेषण: 15 जुलाई — आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई से क्या उम्मीद की जा सकती है?

मंगलवार को GBP/USD मुद्रा जोड़ी में भी काफी सतर्कता के साथ कारोबार हुआ, जबकि उसी दिन फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श (Kevin Warsh) का भाषण, अमेरिकी महंगाई (Inflation) रिपोर्ट और मध्य पूर्व में तनाव का नया दौर—तीनों महत्वपूर्ण घटनाएँ सामने आईं। सिद्धांत रूप में, इन सभी घटनाओं को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जा सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर अवरुद्ध हो गया है, तो यह निश्चित रूप से नकारात्मक खबर है। लेकिन दूसरी ओर, पिछले 4–5 महीनों में यह जलडमरूमध्य जितनी बार खुला रहा है, उससे अधिक बार बंद रहा है। इसलिए लेखक के अनुसार, इसमें कोई नई बात नहीं हुई है। उनका मानना है कि दुनिया धीरे-धीरे मध्य पूर्व के तेल पर अपनी निर्भरता कम करना सीख रही है। यह प्रक्रिया फिलहाल आसान नहीं है, लेकिन दुनिया पूरी तरह मध्य पूर्व के तेल और गैस भंडार पर निर्भर भी नहीं है। जिन्हें ऊर्जा की आवश्यकता होगी, वे हमेशा की तरह वैकल्पिक मार्ग खोज लेंगे।

लेखक का कहना है कि महंगाई के मामले में भी यही स्थिति है। जून में महंगाई घटकर 3.5% पर आ गई, जैसा कि अनुमान लगाया गया था, क्योंकि उस महीने तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर तक नीचे आ गई थीं। लेकिन आगे चलकर महंगाई पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाओं (Geopolitics) पर निर्भर करेगी। मध्य पूर्व की स्थिति किस दिशा में जाएगी और एक महीने बाद तेल की कीमतें क्या होंगी, इसका अनुमान लगाना लगभग असंभव है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो ऊर्जा की कीमतों में भी वृद्धि जारी रह सकती है। इसलिए लेखक के अनुसार, जून की महंगाई रिपोर्ट के आधार पर कोई दीर्घकालिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अमेरिकी कांग्रेस में अपने संबोधन के दौरान केविन वार्श ने स्वीकार किया कि महंगाई अभी भी एक चिंता का विषय है, लेकिन उन्होंने इस वर्ष की शेष अवधि के लिए फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। लेखक के अनुसार, फेड अभी भी "इंतजार करो और देखो" (Wait-and-See) की रणनीति अपना रहा है, क्योंकि मध्य पूर्व की स्थिति किसी भी समय बदल सकती है।

लेखक उदाहरण देते हुए कहते हैं कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य केवल कुछ मिनटों में फिर से खुल सकता है यदि जहाजों पर हमले बंद हो जाएँ, और उसी तरह कुछ ही मिनटों में दोबारा बंद भी हो सकता है। इसलिए, एक ही दिन में हालात कई बार बदल सकते हैं।

लेखक आगे सवाल उठाते हैं कि क्या अमेरिकी डॉलर फिर से मजबूत होगा? उनका मानना है कि ऐसा तभी संभव है जब फेड केवल बयान और संकेत देने तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तव में ब्याज दरें बढ़ाने जैसे कदम उठाए। यदि अमेरिका में महंगाई लगातार ऊँची बनी रहती है और फेड केवल एक बार नहीं बल्कि कई बार ब्याज दरों में वृद्धि करता है, तो वर्ष की शुरुआत में डॉलर के कमजोर होने की उम्मीदों के बावजूद अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है।

हालांकि, लेखक स्वयं इस परिदृश्य को अधिक संभावित नहीं मानते। उनका मानना है कि केविन वार्श मौद्रिक नीति को और सख्त करने से बचने की पूरी कोशिश करेंगे और अवसर मिलते ही नीति में ढील (Monetary Easing) का समर्थन करेंगे।

साथ ही लेखक यह भी कहते हैं कि FOMC (Federal Open Market Committee) के सदस्य अनुभवी हैं और जेरोम पॉवेल, जो अभी दो और वर्षों तक फेड के चेयरमैन बने रहेंगे, सही निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। इसलिए लेखक के अनुसार, स्थिति केवल मध्य पूर्व में ही नहीं, बल्कि स्वयं फेडरल रिजर्व के भीतर भी जटिल बनी हुई है।

उनका मानना है कि 2026 के दौरान मौद्रिक नीति को लेकर मतभेद और बहस काफी तीव्र हो सकती है, जिसके कारण बाजार की धारणा (Market Sentiment) कई बार बदल सकती है। इसी वजह से लेखक फिलहाल मध्यम अवधि (Medium-Term) का कोई स्पष्ट अनुमान लगाने से बचने की सलाह देते हैं।

लेखक के निष्कर्ष के अनुसार, दीर्घकालिक (Long-Term) दृष्टिकोण से अमेरिकी डॉलर अभी भी कमजोरी के रुझान (Downtrend) में है, लेकिन अल्पकालिक (Short-Term) अवधि में इसकी दिशा पूरी तरह अप्रत्याशित घटनाओं पर निर्भर करेगी और यह किसी भी दिशा में जा सकता है।

GBP/USD विश्लेषण: 15 जुलाई — आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई से क्या उम्मीद की जा सकती है?

पिछले पांच ट्रेडिंग दिनों में GBP/USD मुद्रा जोड़ी की औसत अस्थिरता (Average Volatility) 70 पिप्स रही है, जिसे इस जोड़ी के लिए "मध्यम (Average)" माना जाता है। इसलिए बुधवार, 15 जुलाई को इस जोड़ी के 1.3309 से 1.3449 के दायरे में कारोबार करने की संभावना है। ऊपरी लीनियर रिग्रेशन चैनल (Upper Linear Regression Channel) नीचे की ओर झुका हुआ है, जो मंदी (Bearish Trend) का संकेत देता है।

CCI (Commodity Channel Index) दो बार ओवरसोल्ड (Oversold) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और उसने दो बुलिश डाइवर्जेंस (Bullish Divergences) भी बनाए हैं, जो गिरावट के रुझान के समाप्त होने की संभावना दर्शाते हैं। हालांकि, अब इस इंडिकेटर ने एक बेयरिश डाइवर्जेंस (Bearish Divergence) भी बनाया है, जो संभावित कमजोरी का संकेत देता है।

निकटतम सपोर्ट स्तर (Support Levels)

  • S1 – 1.3367
  • S2 – 1.3306
  • S3 – 1.3245

निकटतम रेजिस्टेंस स्तर (Resistance Levels)

  • R1 – 1.3428
  • R2 – 1.3489
  • R3 – 1.3550

ट्रेडिंग सुझाव (Trading Recommendations)

GBP/USD मुद्रा जोड़ी फिलहाल मंदी के रुझान (Downtrend) में बनी हुई है।

लेखक के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती रहेंगी, इसलिए उन्हें अमेरिकी डॉलर में दीर्घकालिक मजबूती की उम्मीद नहीं है। हालांकि, उनके अनुसार 2026 भू-राजनीतिक घटनाओं और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की तत्परता के कारण डॉलर के लिए अब तक काफी सकारात्मक वर्ष साबित हुआ है।

साथ ही, साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर 1.3150 से 1.3780 के बीच एक साइडवेज़ रेंज (Flat Range) बनी हुई है, जो चार वर्षों से जारी दीर्घकालिक तेजी (Uptrend) के भीतर स्थित है।

  • यदि कीमत मूविंग एवरेज (Moving Average) के ऊपर रहती है, तो लॉन्ग (Buy) पोजीशन 1.3428 और 1.3449 के लक्ष्यों के साथ ली जा सकती है।
  • यदि कीमत मूविंग एवरेज के नीचे रहती है, तो शॉर्ट (Sell) ट्रेड का लक्ष्य 1.3306 हो सकता है।

चार्ट में उपयोग किए गए संकेतकों की व्याख्या

  • लीनियर रिग्रेशन चैनल (Linear Regression Channels): वर्तमान ट्रेंड की दिशा और उसकी मजबूती का आकलन करने में मदद करते हैं। यदि दोनों चैनल एक ही दिशा में हों, तो ट्रेंड को मजबूत माना जाता है।
  • मूविंग एवरेज (20,0, Smoothed): अल्पकालिक ट्रेंड और ट्रेडिंग की दिशा निर्धारित करता है।
  • मरे लेवल्स (Murray Levels): संभावित लक्ष्य (Targets) और करेक्शन (Correction) के स्तर दर्शाते हैं।
  • वोलैटिलिटी लेवल्स (लाल रेखाएं): मौजूदा अस्थिरता के आधार पर अगले कुछ दिनों में संभावित मूल्य दायरा (Price Channel) दर्शाते हैं।
  • CCI (Commodity Channel Index):
    • -250 से नीचे जाने पर बाजार ओवरसोल्ड (Oversold) माना जाता है, जिससे तेजी की ओर संभावित बदलाव का संकेत मिल सकता है।
    • +250 से ऊपर जाने पर बाजार ओवरबॉट (Overbought) माना जाता है, जिससे गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।
Analyst InstaForex
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