सोने की कीमत 4,154 डॉलर प्रति औंस से नीचे गिर गई, जबकि स्पॉट गोल्ड की शुरुआत लगभग 4,269 डॉलर के स्तर पर हुई थी। चांदी में इससे भी बड़ी गिरावट आई और इसकी कीमत लगभग 5% नीचे रही। प्लेटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट दर्ज की गई।
डॉलर इंडेक्स में 0.2% की बढ़ोतरी हुई और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड भी बढ़ी, जिससे कीमती धातुओं में निवेशकों की दिलचस्पी कम हुई।
बिकवाली का दबाव उस समय और बढ़ गया जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत गतिरोध में फंस गई। इसके कारण ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहीं और फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में दोबारा बढ़ोतरी करने का दबाव बना रहा।

सोना क्यों गिर रहा है, जबकि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध आठवें महीने में प्रवेश कर चुका है? क्योंकि इस समय सुरक्षित निवेश (safe-haven) की मांग की तुलना में ब्याज दरों का प्रभाव अधिक मजबूत है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर प्रगति नहीं होने के कारण तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। महंगी ऊर्जा महंगाई को बढ़ाती है और महंगाई फेडरल रिजर्व पर मौद्रिक नीति को और सख्त रखने का दबाव डालती है। आज की गिरावट काफी बड़ी रही, जिससे पता चलता है कि बाजार हाल की कूटनीतिक निराशाओं को अभी भी पचा रहा है।
इस महीने की शुरुआत से अब तक सोना लगभग 6% नीचे है और यह गिरावट फेड के फैसले से जुड़ी हुई है। इस महीने केंद्रीय बैंक ने 2023 के बाद पहली बार महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाईं और संकेत दिया कि आगे भी दरों में बढ़ोतरी संभव है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज वृद्धि हुई और अब बाजार अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की लगभग 68% संभावना को कीमतों में शामिल कर रहा है। इससे पहले ट्रेडर्स साल के अंत तक कम से कम 25 बेसिस पॉइंट की एक और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे।
इस स्थिति में डॉलर और बॉन्ड रखने वाले निवेशकों को फायदा हो रहा है, क्योंकि उन्हें ज्यादा यील्ड मिल रही है। वहीं सोना और चांदी रखने वालों को नुकसान हो रहा है, क्योंकि इन परिसंपत्तियों से कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलती।
अमेरिकी अधिकारियों की टिप्पणियां भी महत्वपूर्ण हैं। क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमॉक ने शुक्रवार को कहा कि लंबी अवधि की यील्ड में बढ़ोतरी मजबूत आर्थिक विकास की संभावनाओं, कर्ज को लेकर चिंताओं और आगे ब्याज दर बढ़ने की उम्मीदों को दर्शाती है। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सप्ताहांत में कहा कि नीति-निर्माताओं को ब्याज दरों के मामले में खुले विचार रखने चाहिए। उनका तर्क था कि AI और डिरेग्युलेशन से उत्पादकता में बढ़ोतरी महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। विडंबना यह है कि यह लचीला रुख अपनाने की अपील तीन वर्षों में पहली ब्याज दर बढ़ोतरी के तुरंत बाद और एक और बढ़ोतरी की उम्मीदों के बीच आई है।
मुख्य प्रणालीगत जोखिम अभी भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना हुआ है। यदि कोई कूटनीतिक सफलता नहीं मिलती है, तो महंगाई की चिंताएं और ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें कीमती धातुओं पर दबाव बनाए रखेंगी। अब बाजार इस सप्ताह आने वाले PCE महंगाई के आंकड़ों और अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट पर नजर रखेगा ताकि आगे की दिशा का संकेत मिल सके।
लेख के अनुसार, निकट अवधि में सोने पर दबाव बना रह सकता है, और जब तक तेल महंगा तथा यील्ड ऊंची बनी रहती है, तब तक 4,125 डॉलर से नीचे गिरने का जोखिम भी मौजूद है। चांदी के सोने से कमजोर प्रदर्शन जारी रखने की संभावना है।
सोने में तेजी से वापसी तभी संभव मानी जा रही है जब वास्तविक कूटनीतिक समझौता हो, जिससे तेल की कीमतें नीचे आएं और ब्याज दरों पर दबाव कम हो। फिलहाल यह परिदृश्य कम संभावित दिखाई दे रहा है।

तकनीकी तस्वीर: खरीदारों को सबसे पहले 4,186 डॉलर के नजदीकी प्रतिरोध स्तर को पार करना होगा, ताकि 4,249 डॉलर के लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सके। इसके ऊपर ब्रेकआउट हासिल करना मुश्किल हो सकता है। इसके बाद अगला बड़ा लक्ष्य 4,304 डॉलर है।
गिरावट की स्थिति में बेयर्स (बिकवाली करने वाले) 4,124 डॉलर के स्तर पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करेंगे। यदि वे इसमें सफल होते हैं, तो इस रेंज का ब्रेक बुल्स (तेजी वाले ट्रेडर्स) को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और सोने की कीमत को 4,062 डॉलर तक नीचे ला सकता है। इसके बाद 4,047 डॉलर तक गिरने की संभावना भी बन सकती है।