क्रिप्टो एक्सचेंज क्रैकन के एक वरिष्ठ एक्ज़ीक्यूटिव के अनुसार, इंडस्ट्री अब “टोकनाइज़ेशन के युग” में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ ब्लॉकचेन तकनीक के ज़रिए एसेट्स को लगभग तुरंत अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के बीच ट्रांसफर किया जा सकता है। पारंपरिक वित्तीय ढांचे में यही प्रक्रिया कई दिन या甚至 हफ्तों तक ले सकती है।
एक्ज़ीक्यूटिव का तर्क है कि टोकनाइज़ेशन बाज़ारों में मौजूद उन पुरानी अड़चनों को खत्म करता है, जो पिछले आधे से ज़्यादा सदी से लगभग बिना बदले बनी हुई थीं। उन्होंने कहा कि टोकनाइज़्ड शेयरों का सेटलमेंट कुछ ही सेकंड में हो सकता है और इसके लिए लंबे क्लियरिंग साइकल्स की ज़रूरत नहीं होती, जो पूंजी को फँसाते हैं और जोखिम बढ़ाते हैं।
विशेषज्ञ के अनुसार, टोकनाइज़ेशन इक्विटीज़ और कीमती धातुओं से लेकर विदेशी मुद्राओं तक, कई तरह के एसेट्स को ऑन-चेन लाने की क्षमता रखता है। इससे निवेशकों और संस्थानों को पूंजी आवंटित करने और अपनी रणनीतियाँ अनुकूलित करने के नए तरीके मिलते हैं।
फिलहाल टोकनाइज़्ड एसेट्स का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 415 अरब डॉलर है। बाज़ार की वृद्धि को लेकर अनुमान अलग-अलग हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप का अनुमान है कि 2030 तक यह लगभग 16 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है, जबकि मैकिंज़ी के अनुसार यह बाज़ार 20 ट्रिलियन डॉलर के क़रीब पहुँच सकता है, हालांकि अगले दशक में इसके इससे आगे जाने की संभावना कम है।
वित्तीय नियामक भी टोकनाइज़ेशन में रुचि दिखा रहे हैं। SEC चेयर पॉल एटकिंस पहले यह सुझाव दे चुके हैं कि ब्लॉकचेन तकनीक इक्विटीज़ और बॉन्ड्स सहित पारंपरिक कैपिटल मार्केट्स को आधुनिक बनाने का एक प्रभावी तरीका हो सकती है।