चीन के सीमा शुल्क के सामान्य प्रशासन (General Administration of Customs) ने बताया कि जनवरी से अप्रैल 2026 के दौरान रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 26% की वृद्धि हुई है। रूस ने चीनी बाजार में कच्चे तेल के सबसे बड़े निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति सफलतापूर्वक बनाए रखी है और प्रमुख मानकों पर अन्य अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं को पीछे छोड़ दिया है।
पिछले चार महीनों में चीन द्वारा खरीदे गए रूसी कच्चे तेल की कुल मात्रा 4.083 करोड़ टन रही, जिसकी कीमत लगभग 20.4 अरब डॉलर थी। यह मूल्य के आधार पर 21.5% की वृद्धि को दर्शाता है।
अप्रैल 2026 में चीनी आयातकों ने रूस से 89.7 लाख टन तेल खरीदा, जो मार्च की तुलना में भौतिक आयात मात्रा में 10.8% की कमी थी। हालांकि, अप्रैल में तेल आपूर्ति का कुल मूल्य महीने-दर-महीने 18.6% बढ़कर 6.31 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
चीन के आयात ढांचे में सऊदी अरब दूसरे स्थान पर रहा, जिसने इस अवधि के दौरान अपनी आपूर्ति में 10.3% की कमी करते हुए 2.297 करोड़ टन तेल निर्यात किया।
तीसरे स्थान पर ब्राज़ील रहा, जिसने अपने निर्यात में 84% की वृद्धि करते हुए चीन को 2.091 करोड़ टन कच्चा तेल भेजा।
मलेशिया चौथे स्थान पर रहा, जिसकी आपूर्ति 33% घटकर 1.749 करोड़ टन रह गई।
वहीं इंडोनेशिया शीर्ष पांच आपूर्तिकर्ताओं की सूची में पांचवें स्थान पर रहा। उसने अपनी तेल आपूर्ति में 122 गुना वृद्धि करते हुए 1.41 करोड़ टन तेल चीन को भेजा।
रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने हाल ही में कहा कि तेल और गैस आपूर्ति के क्षेत्र में मौजूदा सहयोग से रूसी पक्ष पूरी तरह संतुष्ट है। उन्होंने साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से आगामी वार्ताओं की योजना की घोषणा की।
बीजिंग की सरकारी प्रतिनिधिमंडल यात्रा के दौरान, रूस और चीन संयुक्त ऊर्जा परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा करने की योजना बना रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने की उम्मीद है।