केविन वॉर्श, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष, बढ़ती मुद्रास्फीति के दबाव में
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नव-नियुक्त अध्यक्ष केविन वॉर्श ने ऐसे समय में अपना कार्यकाल शुरू किया है, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था बढ़ती मुद्रास्फीति और कई आर्थिक झटकों जैसी चुनौतीपूर्ण व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रही है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) की एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा स्थिति ने निवेशकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वॉर्श, जो पहले सख्त मौद्रिक नीति के समर्थक रहे हैं, अपने पुराने रुख पर कायम रहेंगे या अधिक नरम (Accommodative) नीति की ओर बढ़ेंगे।
ऐतिहासिक रूप से, फेडरल रिजर्व के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में अपने कार्यकाल के दौरान वॉर्श को एक “कट्टर हॉक” (मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सख्त नीति समर्थक) माना जाता था। हालांकि, हाल के समय में उनके बयानों में बदलाव देखा गया है और वे ब्याज दरों में कटौती के समर्थन में दिखाई दिए हैं। नए फेड चेयरमैन का मानना है कि नीति निर्धारण में कोर मुद्रास्फीति संकेतकों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए तथा व्यापार शुल्क (टैरिफ) और भू-राजनीतिक घटनाओं जैसे बाहरी कारकों को कीमतों में वृद्धि के आकलन से अलग रखा जाना चाहिए।
फिर भी, वॉर्श के उभरते हुए “डोविश” (नरम रुख वाले) दृष्टिकोण को फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के अन्य सदस्यों से कड़ा विरोध मिल सकता है। अमेरिका में मुद्रास्फीति के दबाव बढ़ने के साथ ही वित्तीय बाजारों ने अपनी अपेक्षाओं में बड़ा बदलाव किया है। ट्रेडर्स ने निकट भविष्य में ब्याज दर कटौती की संभावनाओं को लगभग पूरी तरह से छोड़ दिया है और अब वे मौद्रिक नीति के फिर से सख्त होने की संभावना को कीमतों में शामिल कर रहे हैं।
इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव को लेकर वॉर्श का आशावादी दृष्टिकोण भी फेड के भीतर नई बहस को जन्म दे सकता है। उनका मानना है कि AI तकनीकें उत्पादकता में संरचनात्मक वृद्धि को बढ़ावा देंगी और लंबे समय में कीमतों को कम करने में मदद करेंगी। हालांकि, BofA के विश्लेषकों का कहना है कि वॉर्श को इस दृष्टिकोण का बचाव करने में कठिनाई हो सकती है, क्योंकि FOMC के अधिकांश सदस्य तकनीकी प्रगति से मिलने वाले संभावित दीर्घकालिक लाभों के बजाय ठोस सांख्यिकीय आंकड़ों पर भरोसा करना पसंद करते हैं।
साथ ही, विश्लेषक वॉर्श को “बैलेंस-शीट हॉक” भी बताते हैं। नए अध्यक्ष का ध्यान फेड की परिसंपत्ति (Asset) होल्डिंग्स की वृद्धि को नियंत्रित करने पर रहने की संभावना है। वे लक्षित नियामकीय बदलावों के माध्यम से मध्यम अवधि में बैंकिंग प्रणाली की रिजर्व मांग को लगभग 200 अरब डॉलर से 500 अरब डॉलर तक कम करने का प्रयास कर सकते हैं।
अंततः, वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की भविष्य की दिशा काफी हद तक फेड के भीतर चल रहे शक्ति-संघर्ष के परिणाम पर निर्भर करेगी। यह संघर्ष इस बात पर केंद्रित है कि क्या वॉर्श अपनी नई, अपेक्षाकृत नरम मौद्रिक नीति को लागू करने में सफल होंगे, या फिर केंद्रीय बैंक की संस्थागत परंपराएं उन्हें मुद्रास्फीति के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखने के लिए मजबूर करेंगी।