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FX.co ★ जब आर्थिक बुनियाद डगमगा जाए: चीन का बंद रास्ता

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तस्वीरों में खबर:::2026-07-27T05:07:21

जब आर्थिक बुनियाद डगमगा जाए: चीन का बंद रास्ता

बेकाबू निर्माण का दौर खत्म

एवरग्रांडे (Evergrande) का स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट होना चीन में वर्षों तक चले बेतहाशा निर्माण के दौर के अंत का प्रतीक बन गया। अपने चरम पर कंपनी का बाज़ार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइज़ेशन) 50 अरब डॉलर से भी अधिक था, और उसके शेयरों की मांग उपलब्ध शेयरों की तुलना में 46 गुना ज़्यादा थी।

लेकिन इसी दौरान कंपनी पर 300 अरब डॉलर का भारी-भरकम कर्ज़ चढ़ गया और अंततः उसने डिफॉल्ट घोषित कर दिया। अमेरिका में दिवालियापन (बैंक्रप्सी) की कार्यवाही और हांगकांग की अदालत द्वारा दिए गए परिसमापन (लिक्विडेशन) के आदेश के बाद कंपनी का प्रबंधन बाहरी प्रशासकों (External Administrators) के हाथों में चला गया। इसके साथ ही दिवालिया हो चुके समूह की समस्याओं और उसके पीछे छोड़ी गई विरासत भी सामने आ गई।

आज भी एवरग्रांडे के 280 शहरों में लगभग 1,300 निर्माणाधीन प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं, जबकि लाखों आम खरीदार ऐसे हैं जो वर्षों पहले अपने फ्लैट की पूरी कीमत चुका चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपने घरों का कब्ज़ा नहीं मिल पाया है।

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चीनी डोमिनो प्रभाव

बाज़ार के सबसे बड़े खिलाड़ी के पतन ने डोमिनो प्रभाव (एक के बाद एक गिरने वाली श्रृंखला) को जन्म दिया। जल्द ही चीन के रियल एस्टेट सेक्टर की अन्य दिग्गज कंपनियाँ — कंट्री गार्डन (Country Garden) और सुनैक (Sunac) — भी कर्ज़ चुकाने में असफल (डिफॉल्ट) हो गईं।

इस संकट का पैमाना बेहद भयावह है। अकेले कंट्री गार्डन के सैकड़ों शहरों में लगभग 10 लाख फ्लैटों का निर्माण अधूरा पड़ा है, जबकि कंपनी का छह महीने का घाटा 3 अरब डॉलर से अधिक रहा। हालात इतने गंभीर हो गए कि कंपनी को 14 अरब डॉलर के कर्ज़ का तत्काल पुनर्गठन (Debt Restructuring) करना पड़ा।

इस बीच, हांगकांग की अदालतें चीन की छह प्रमुख राष्ट्रीय रियल एस्टेट कंपनियों के अनिवार्य परिसमापन (Compulsory Liquidation) का आदेश दे चुकी हैं।

इस संकट से पैदा हुई डोमिनो श्रृंखला इतनी शक्तिशाली साबित हुई कि इसका असर केवल चीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने वैश्विक कच्चे तेल (Oil) और लौह अयस्क (Iron Ore) के बाज़ारों को भी नीचे खींच लिया।

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हमेशा चलता रहने वाले इंजन का वादा

यह कहानी 1998 में शुरू हुई, जब चीन की सरकार ने निजी व्यक्तियों को पहली बार स्वतंत्र रूप से घर खरीदने और बेचने की अनुमति दी। इसके बाद तेज़ी से हुए शहरीकरण (Urbanization) के कारण लगभग 48 करोड़ लोग शहरों में आकर बस गए।

निर्माण क्षेत्र में आए इस अभूतपूर्व उछाल ने चीन को वैश्विक कमोडिटी बाज़ार का सबसे बड़ा चालक बना दिया। देश ने धातुओं, सीमेंट और कच्चे तेल की भारी मात्रा में खपत की। धीरे-धीरे निर्माण क्षेत्र और उससे जुड़े उद्योगों का योगदान बढ़कर चीन की कुल जीडीपी (GDP) के 25% से भी अधिक हो गया।

स्थानीय सरकारों के लिए विकास परियोजनाओं के उद्देश्य से ज़मीन बेचकर राजस्व जुटाना आय का सबसे बड़ा स्रोत बन गया। उस समय यह पूरा क्षेत्र एक ऐसे इंजन की तरह दिखाई देता था, जो मानो बिना रुके कई दशकों तक चीन की अर्थव्यवस्था को गति देता रहेगा।

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कंक्रीट में समृद्धि का भ्रम

करीब 15 वर्षों में चीन में मकानों की कीमतें छह गुना बढ़ गईं। सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के अपेक्षाकृत कमजोर होने और वित्तीय बाज़ारों में बार-बार होने वाले हस्तक्षेप के कारण आम नागरिकों के लिए मकान ही सबसे सुरक्षित निवेश बन गए।

लोगों ने कंक्रीट और रियल एस्टेट को महँगाई से बचाव का सबसे भरोसेमंद माध्यम मान लिया और अपने घरेलू धन-संपत्ति का लगभग 80% हिस्सा मकानों में निवेश कर दिया।

2019 तक चीन के रियल एस्टेट बाज़ार का आकार बढ़कर 52 ट्रिलियन डॉलर के विशाल स्तर पर पहुँच गया, जो अमेरिकी रियल एस्टेट बाज़ार से लगभग दोगुना था।

जब भी इस क्षेत्र में संकट के शुरुआती संकेत दिखाई देते, चीनी सरकार और संबंधित प्राधिकरण रियल एस्टेट कंपनियों को रियायतें और सस्ती ऋण सुविधा देकर उनका सहारा बन जाते। इस तरह लगातार सरकारी समर्थन ने इस विशाल वित्तीय बुलबुले को कृत्रिम रूप से और अधिक फुला दिया

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खामोश भूतिया शहर

बेकाबू निर्माण की इस होड़ का दूसरा और सबसे भयावह परिणाम आज दुनिया भर में चर्चित 'घोस्ट सिटीज़' (Ghost Cities) के रूप में सामने आया है। जब रियल एस्टेट बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा था, तब डेवलपर्स ने बिना इस बात की परवाह किए कि कितने मकान बिकेंगे, लगातार गगनचुंबी इमारतें और आवासीय परियोजनाएँ खड़ी कर दीं।

लेकिन जैसे ही बाज़ार में गिरावट आई, ये विशाल कंक्रीट के जंगल बेकार खर्च और गलत निवेश के प्रतीक बन गए। कई नए शहर और पूरे-के-पूरे आवासीय इलाके आज भी लगभग खाली पड़े हैं, जहाँ सैकड़ों इमारतों में केवल इक्का-दुक्का खिड़कियों में ही रोशनी दिखाई देती है।

आज स्थिति यह है कि बाज़ार में नए फ्लैटों की उपलब्धता ऐतिहासिक औसत से लगभग दोगुनी हो चुकी है। इस गंभीर संकट की गहराई को समझते हुए, निर्माण कंपनियों ने नई परियोजनाओं की शुरुआत में भारी कटौती कर दी। 2025 के शुरुआती महीनों में नए निर्माण (New Builds) की मात्रा में लगभग 20% की गिरावट दर्ज की गई।

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कीमतों में लगातार गिरावट

2023 की दूसरी छमाही (H2 2023) से चीन के लगभग सभी प्रमुख शहरों में पुराने (रीसेल) मकानों की कीमतें लगातार गिर रही हैं। मकानों की बिक्री, नए आवासीय परियोजनाओं की शुरुआत (Housing Starts) और पूर्ण हुए निर्माण क्षेत्र (Completed Floor Space) — तीनों ही पिछले 16 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं।

खरीदार फिलहाल इंतज़ार की मुद्रा में हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि कीमतें आगे और गिर सकती हैं। दूसरी ओर, रियल एस्टेट डेवलपर्स के पास मकानों की कीमतें बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

जिन लोगों को यह विश्वास था कि उनकी रियल एस्टेट संपत्ति की कीमतें हमेशा बढ़ती रहेंगी, उन्हें अब कठोर सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है। बाज़ार में मकानों की आपूर्ति ज़रूरत से कहीं अधिक हो चुकी है, जबकि मांग लगातार कमजोर बनी हुई है। परिणामस्वरूप, मकानों की कीमतों में गिरावट और तेज़ होती जा रही है।

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बर्बाद हो गए कई साल

चीन के आम लोगों की वास्तविक कहानियाँ इस संकट से हुई व्यक्तिगत त्रासदी की गहराई को उजागर करती हैं।

हेफ़ेई (Hefei) की एक महिला ने अपना पूरी तरह सुसज्जित (फर्निश्ड) फ्लैट 3,30,000 डॉलर में बिक्री के लिए रखा, यानी ठीक उसी कीमत पर, जितने में उसने इसे तीन साल पहले खरीदा था। इस दौरान वह फ्लैट के नवीनीकरण (Renovation) पर 80,000 डॉलर अतिरिक्त खर्च भी कर चुकी थी। इसके बावजूद खरीदार कम से कम 15% की छूट की मांग कर रहे थे।

वहीं लिली झांग (Lili Zhang) नामक एक अन्य महिला ने आखिरकार बीजिंग में अपना फ्लैट बेचने में सफलता तो हासिल की, जिसे उसने 2016 में बाज़ार के चरम पर खरीदा था। लेकिन उसे फ्लैट उसी कीमत पर बेचना पड़ा, जिस कीमत पर उसने उसे खरीदा था।

उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि नौ वर्षों तक होम लोन (मॉर्गेज) की किस्तें चुकाने के बाद भी ऐसा लगता है मानो वे साल पूरी तरह व्यर्थ चले गए हों, जैसे इस पूरे समय में कुछ भी हासिल नहीं हुआ।

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किफायती आवास का अंत

इस संकट की जड़ चीन सरकार का वह फैसला था, जिसमें बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा के लिए रियल एस्टेट डेवलपर्स द्वारा लिए जाने वाले अत्यधिक कर्ज़ (Leverage) पर सख्त नियंत्रण लगाया गया।

इससे पहले चीन के बड़े महानगरों में मकानों की कीमतें बेहद असामान्य स्तर तक पहुँच चुकी थीं। उदाहरण के लिए, हाई-टेक हब शेनझेन (Shenzhen) में 2020 के दौरान एक औसत दो बेडरूम वाले फ्लैट की कीमत किसी परिवार की वार्षिक आय की 43 गुना थी, यानी लगभग 9 लाख डॉलर। तुलना करें तो न्यूयॉर्क में यही अनुपात केवल 10 गुना था।

लगातार कर्ज़ पर आधारित इस व्यवस्था ने युवा पीढ़ी के लिए अपना घर खरीदना लगभग असंभव बना दिया। इसके बाद बीजिंग ने रियल एस्टेट कंपनियों के लिए कर्ज़ देने के सख्त नियम लागू कर दिए, जिससे डेवलपर्स के पास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी (Working Capital) की भारी कमी हो गई।

फिर कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों ने इस पहले से कमजोर व्यवस्था को पूरी तरह हिला दिया। परिणामस्वरूप, निर्माण पूरा होने से पहले ही फ्लैट बेचने (Off-Plan Sales) का मॉडल लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गया।

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जापान की परछाई

2021 में आए शिखर (Peak) के बाद से चीन में अपार्टमेंट की कीमतें लगभग 20% तक गिर चुकी हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जब लोगों की सबसे बड़ी संपत्ति—उनका घर—हर महीने अपनी कीमत खो रही हो, तो उनसे दुकानों में अधिक खर्च करने की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है।

रियल एस्टेट क्षेत्र की इस मंदी ने पूरे देश में खुदरा कारोबार (Retail) और निवेश (Investment) को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

हालाँकि, चीन का रियल एस्टेट बाज़ार 1990 के शुरुआती दशक में जापान की तरह एक ही झटके में नहीं ढहा, लेकिन पिछले पाँच वर्षों से चला आ रहा यह लंबा संकट लगभग उसी तरह के गंभीर जोखिम पैदा कर रहा है।

विशेषज्ञों को आशंका है कि चीन भी अपने पड़ोसी जापान की राह पर चल सकता है, जहाँ संपत्ति बाज़ार के बुलबुले के फूटने के बाद देश को लंबे समय तक आर्थिक ठहराव (Economic Stagnation) का सामना करना पड़ा था। यदि मौजूदा हालात बने रहे, तो चीन भी टूटी हुई उम्मीदों और धीमी आर्थिक वृद्धि के लंबे दौर में फँस सकता है।

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