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FX.co ★ एप्पल ने ChatGPT बनाने वाली कंपनी पर गुप्त डिवाइस तकनीकों की चोरी का आरोप लगाया।

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विदेशी मुद्रा हास्य:::2026-07-16T10:35:03

एप्पल ने ChatGPT बनाने वाली कंपनी पर गुप्त डिवाइस तकनीकों की चोरी का आरोप लगाया।

एप्पल ने OpenAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिसमें ChatGPT बनाने वाली कंपनी पर विकासाधीन (Under Development) डिवाइसों से जुड़े व्यापारिक रहस्यों (Trade Secrets) को व्यवस्थित रूप से चुराने का आरोप लगाया गया है। कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में दायर शिकायत के अनुसार, एआई स्टार्टअप ने कथित तौर पर एप्पल से नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को इंटरव्यू के दौरान अभी तक सार्वजनिक न किए गए (Unannounced) गैजेट्स के प्रोटोटाइप और पुर्जे (Components) साथ लाने के लिए प्रोत्साहित किया। एप्पल का दावा है कि OpenAI का हार्डवेयर व्यवसाय चोरी की गई बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) पर आधारित है। कंपनी ने अदालत से इन सामग्रियों के उपयोग पर रोक लगाने और आर्थिक हर्जाना दिलाने की मांग की है।

OpenAI के अलावा, मुकदमे में एप्पल के पूर्व इंजीनियर चान लियू (Chan Liu) और तांग यू टैन (Tang Yu Tan), जो वर्तमान में OpenAI में हार्डवेयर प्रमुख हैं, को भी प्रतिवादी बनाया गया है। शिकायत के अनुसार, चान लियू ने कंपनी द्वारा जारी किए गए लेकिन वापस न किए गए लैपटॉप की एक सुरक्षा खामी का फायदा उठाकर दर्जनों गोपनीय फाइलें डाउनलोड कीं। वहीं, तांग यू टैन पर आरोप है कि उन्होंने एप्पल के आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) से संबंधित डेटा खुद को ईमेल किया और इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों से भी गोपनीय जानकारी एकत्र की। OpenAI ने इन सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि कंपनी अपनी स्वयं की तकनीकों के विकास पर केंद्रित है और उसे अन्य कंपनियों के व्यापारिक रहस्यों में कोई रुचि नहीं है।

इस मुकदमे से यह भी पुष्टि होती है कि दोनों कंपनियों के बीच वह साझेदारी टूट गई है, जिसके तहत ChatGPT को Siri में एकीकृत (Integrate) करने की योजना बनाई जा रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, OpenAI के कुछ बड़े कदमों—जिनमें पूर्व एप्पल डिज़ाइनर जॉनी आइव (Jony Ive) द्वारा स्थापित Studio IO का 6.5 अरब डॉलर में अधिग्रहण भी शामिल है—के बाद दोनों कंपनियों के संबंध खराब हो गए।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एप्पल पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। एआई चिप्स की कमी के कारण कंपनी को अपने गैजेट्स की कीमतें बढ़ानी पड़ीं, जिससे एशियाई बाजारों में उथल-पुथल मच गई और कुछ समय के लिए एप्पल बाज़ार पूंजीकरण (Market Capitalization) के आधार पर दुनिया की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी का स्थान भी खो बैठा।

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